उत्तराखण्ड में मदरसा बोर्ड समाप्त, अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का शुभारंभ
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देहरादून। उत्तराखण्ड सरकार ने शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए राज्य में मदरसा बोर्ड को समाप्त कर उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना कर दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को मुख्यमंत्री आवास में आयोजित कार्यक्रम के दौरान नए प्राधिकरण का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर विभिन्न अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता प्रमाण पत्र वितरित किए गए तथा विद्यार्थियों को एनसीईआरटी की पुस्तकें भी भेंट की गईं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य सभी अल्पसंख्यक समुदायों के बच्चों को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और समान शिक्षा उपलब्ध कराना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नई व्यवस्था किसी समुदाय की परंपराओं या पहचान को प्रभावित करने के लिए नहीं, बल्कि बच्चों को आधुनिक शिक्षा, विज्ञान, तकनीक और कौशल विकास से जोड़ने के लिए लागू की गई है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड ज्ञान, शिक्षा और आध्यात्म की समृद्ध परंपरा वाला राज्य है और सरकार चाहती है कि शिक्षा के क्षेत्र में राज्य देश के लिए एक आदर्श मॉडल बने। इसी सोच के तहत 1 जुलाई 2026 से उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना की गई है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि वर्तमान समय कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), मशीन लर्निंग, डिजिटल तकनीक और नवाचार का युग है। ऐसे में राज्य का कोई भी बच्चा आधुनिक शिक्षा और तकनीकी विकास की दौड़ में पीछे न रहे, इसके लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था के तहत सभी अधिसूचित छह अल्पसंख्यक समुदायों के बच्चों को समान अवसर उपलब्ध होंगे। साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप शिक्षा को कौशल विकास, नवाचार, अनुसंधान, उद्यमिता और रोजगार से जोड़ा जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड सरकार डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट कक्षाओं, स्टार्टअप संस्कृति और आधुनिक प्रशिक्षण को बढ़ावा दे रही है। अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण केवल मान्यता देने वाली संस्था नहीं होगा, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण, पारदर्शिता और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।

उन्होंने शिक्षण संस्थानों से आह्वान किया कि वे केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि संस्कारित, संवेदनशील और राष्ट्रहित के प्रति समर्पित नागरिक तैयार करने की दिशा में भी कार्य करें। उन्होंने विश्वास जताया कि यह पहल आने वाले समय में हजारों विद्यार्थियों के भविष्य को नई दिशा देगी और उत्तराखण्ड को समावेशी एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाएगी।

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक प्रदीप बत्रा, विधायक उमेश शर्मा काउ, विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते, उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि, धर्मगुरु, शिक्षाविद और शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।