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उत्तराखंड

बेटी को न्याय दिलाने के लिए वर्षों तक लड़ा पिता, अब सरकार से सवाल—क्या बेटियां सच में सुरक्षित हैं?

✍ Javed Ansari 🕒 20 Aug 2026, 05:05 PM
बेटी को न्याय दिलाने के लिए वर्षों तक लड़ा पिता, अब सरकार से सवाल—क्या बेटियां सच में सुरक्षित हैं?

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हरिद्वार। अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए वर्षों तक संघर्ष करने वाले पीड़ित पिता डॉ. राकेश बंसल ने सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बेटियों की सुरक्षा को लेकर किए जा रहे दावों पर भी सवाल खड़ा करते हुए कहा कि यदि एक बेटी की खुलेआम हत्या हो जाए और उसके परिवार को न्याय के लिए वर्षों तक स्वयं संघर्ष करना पड़े, तो सुरक्षा के दावों का वास्तविक अर्थ क्या रह जाता है?


डॉ. राकेश बंसल के मुताबिक उनकी बेटी स्वर्गीय वंशिका बंसल की 3 मार्च 2022 को सिद्धार्थ फार्मेसी कॉलेज के गेट के बाहर अभियुक्त आदित्य तोमर ने कथित रूप से गोली मारकर हत्या कर दी थी। घटना के बाद परिवार को उम्मीद थी कि उन्हें राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर हरसंभव सहयोग मिलेगा, लेकिन उनका कहना है कि उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाया।


हाईकोर्ट से जमानत के बाद भी नहीं मानी हार
बेटी की हत्या के मामले में अभियुक्त आदित्य तोमर को नैनीताल हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद भी डॉ. बंसल ने संघर्ष जारी रखा। उन्होंने न्याय की उम्मीद में स्वयं सुप्रीम कोर्ट में मामले की पैरवी की और लगातार कानूनी लड़ाई लड़ते रहे।


डॉ. बंसल का कहना है कि लंबे संघर्ष के बाद उनकी मेहनत रंग लाई और अभियुक्त आदित्य तोमर को उम्रकैद की सजा हुई। हालांकि, उनका कहना है कि बेटी को खोने का दर्द और न्याय के लिए परिवार द्वारा झेली गई पीड़ा को किसी शब्द में बयां नहीं किया जा सकता।
मुख्यमंत्री से मुलाकात नहीं होने पर जताई नाराजगी
डॉ. बंसल ने इस बात पर भी दुख जताया कि इतने बड़े संकट और लंबे संघर्ष के बावजूद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से पीड़ित परिवार की सुध लेने अथवा उनसे मुलाकात करने की पहल नहीं हुई।


उन्होंने कहा कि सरकार मंचों से लगातार बहन-बेटियों की सुरक्षा की बात करती है, लेकिन ऐसे मामलों में पीड़ित परिवारों को वास्तविक स्तर पर कितना सहयोग मिलता है, इस पर भी गंभीरता से विचार होना चाहिए।


“अगर बेटी की हत्या के बाद भी परिवार अकेला संघर्ष करे तो सुरक्षा के दावों का क्या अर्थ?”
पीड़ित पिता ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी बेटी की खुलेआम गोली मारकर हत्या कर दी जाए और उसके परिवार को न्याय पाने के लिए वर्षों तक खुद संघर्ष करना पड़े, तो बेटियों की सुरक्षा को लेकर किए जा रहे दावों का क्या अर्थ रह जाता है?
उन्होंने कहा कि अपराध के बाद केवल आरोपी को सजा दिलाना ही सरकार और व्यवस्था की जिम्मेदारी नहीं होनी चाहिए। पीड़ित परिवार को न्याय की पूरी प्रक्रिया के दौरान प्रशासनिक, कानूनी और मानवीय सहयोग भी मिलना जरूरी है।


सरकार से मांग—दूसरे परिवारों को अकेले न लड़ना पड़े
डॉ. राकेश बंसल ने सरकार से मांग की है कि पीड़ित परिवारों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए और उन्हें न्याय की लड़ाई में आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि किसी अन्य परिवार को अपनी बेटी के लिए न्याय पाने के लिए वर्षों तक अकेले संघर्ष न करना पड़े। उनके अनुसार, बेटियों की सुरक्षा का दावा तभी सार्थक होगा, जब किसी घटना के बाद पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए शासन और प्रशासन भी मजबूती से उसके साथ खड़ा दिखाई दे।

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